गहरी चिंता मे , मै बैठा हूँ | असमंजस मे , मै बैठा हूँ | क्या करूँ , ये समझ न आये | हाथ धरे , मै बैठा हूँ || दिल कि सुनूँ , या दिमाग कि | ख्यालों मे बस बैठा हूँ | रात को नींद , न दिन को चैन | जलती आग सी धूप मे , मै बैठा हूँ | हँसता था ; मै भी कभी | अपनी ही धुन मे , खोया रहता था | आज मायूस सा, मै बैठा हूँ | भविष्य चिंता मे बैठा हूँ | गहरी चिंता मे बैठा हूँ ,हाथ धरे मै बैठा हूँ | आज दिल से आवाज निकली , झंकृत होकर ही निकली | यूँ ही चुप-चाप ,क्यूँ बैठे हो | हाथ धरे क्योँ बैठे हो |